समुद्र और पर्वत

Published by Himanshu Rai

August 14, 2020

मैने समुद्र नही देखा..
लोगों का भरा हुआ मन देखा है

मैने कोई पर्वत नहीं देखा..
दुःख से पत्थर हुए लोगों को देखा है..

और मन कहता है बार-बार..

समुद्र और भरा हुआ मन
पर्वत और पत्थर बन चुके लोग……

एक जैसे होते हैं न ?

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मुझे मेरी उङान ढूँढने दो।
खोई हुई पहचान ढूँढने दो।

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