..मेरे साँवरे…

Published by Shankar Singh Rai

August 14, 2020

प्रेम मुझसे नही,न सही ,न सही,
इतना उपकार कर दो मेरे साँवरे।
उम्र भर न मिलो तो शिकायत नहीं
इस पहर प्यार कर दो मेरे साँवरे।।
प्रेम मुझसे नही,न सही, न सही……

बिंदियाँ,चूड़ियाँ मुझको भाती नही
पायलें अब किसी से लजाती नही
रूप ढकने से करती है घूँघट मना
मुँह दिखाई की बेला भी आती नही

मैं अकेली हूँ,बेसुध हूँ,निष्प्राण हूँ
चूमकर प्राण भर दो ….मेरे साँवरे।
उम्र भर न मिलो तो शिकायत नहीं
इस पहर प्यार कर दो मेरे साँवरे।।
प्रेम मुझसे नही,न सही ,न सही……

सहन होता नही सबका यूँ झाँकना,
हूँ तुम्हारी प्रिया, न कि वारांगना
लाज मेरी नही,प्रेम की तो रखो..
मुझको सिंदूर तुमसे,नही माँगना

मेरे गजरे के दो ,फूल ही तोड़ लो
मसल कर माँग भर दो,मेरे साँवरे।
उम्र भर न मिलो तो शिकायत नहीं
इस पहर प्यार कर दो मेरे साँवरे।।
प्रेम मुझसे नही,न सही,न सही……

जाना है,जाइये,मैं नही रोकती
किसके कांधे पे रोऊँ,बता दीजिए
रात यूहीं सुहागन ,न बदनाम हो
जाते जाते ये दीपक,बुझा दीजिये

तुम लगाकर गले,मुझसे मुझको विदा
आखिरी बार कर दो ..मेरे साँवरे।
उम्र भर न मिलो तो शिकायत नहीं
इस पहर प्यार कर दो मेरे साँवरे।।
प्रेम मुझसे नही न सही न सही……

(शब्दार्थ:वारांगना=वेश्या)

Recently Published:

नारी

मुझे मेरी उङान ढूँढने दो।
खोई हुई पहचान ढूँढने दो।

read more

0 Comments

%d bloggers like this: