निशानी

Published by Shankar Singh Rai

August 14, 2020

वो दोनों,
जो एक दूसरे से अथाह प्रेम करते थे

सहेज कर रखते थे
एक-दूसरे के तोहफे,
प्रेम की निशानियाँ समझकर

वो दोनों ,

हाँ,
वही दोनों

समाज की बंदिशों से घबरा गए
और उनके प्रेम की असली निशानी
सुबह-सुबह
कचरे के ढ़ेर में आवारा कुत्ते
नोंच-नोंच कर खा गए

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मुझे मेरी उङान ढूँढने दो।
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