…दोस्तो

Published by Editor-in-Chief

August 14, 2020

हर तलब मेरी वो सुनता देखता है दोस्तो
साथ मेरे हर नफ़स मेरा ख़ुदा है दोस्तो

कुछ भी ता हद्द ए नज़र साबित नज़र आता नहीं
बट गया हूँ मैं कि मंज़र बट गया है दोस्तो

अज़्म भी है ज़ीस्त की लहरें भी हैं बिफरी हुईं
और हाथों में मिरे कच्चा घड़ा है दोस्तो

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नारी

मुझे मेरी उङान ढूँढने दो।
खोई हुई पहचान ढूँढने दो।

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