दरार

Published by Editor-in-Chief

August 14, 2020

ख़त्म हुआ ईंटों के जोड़ का तनाव
प्लास्टर पर उभर आई हल्की-सी मुस्कान
दौड़ी-दौड़ी चीटियाँ ले आईं अपना अन्न-जल
फूटने लगे अंकुर
जहाँ था तनाव वहाँ
होने लगा उत्सव
हँसी
हँसी

हँसते-हँसते दोहरी हुई जाती है दीवार।

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नारी

मुझे मेरी उङान ढूँढने दो।
खोई हुई पहचान ढूँढने दो।

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