घर

Published by Himanshu Rai

August 14, 2020

जिन्दगी की डोली
बस, सफर में रहती है

कुछ बेटियां
ब्याह दी जाती हैं, इतनी दूर

बाप का चौखट छूटता है जबसे
‘घर’ नसीब नही होता…

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नारी

मुझे मेरी उङान ढूँढने दो।
खोई हुई पहचान ढूँढने दो।

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