कुछ तुम ने कहा,कुछ हम ने सुना

Published by Editor-in-Chief

August 14, 2020

इक रोज़ वफ़ा के मेले में
जब दोनों थे तो अकेले में
कुछ तुम ने कहा,कुछ हम ने सुना

रुक रुक कर सहजे सहजे में
राधा और कृष्ण के लहजे में
कुछ तुम ने कहा,कुछ हम ने सुना

कुछ ढूँढ़ के दिल के बस्ते में
फूलों से महकते रस्ते में
कुछ तुम ने कहा,कुछ हम ने सुना

इक वज़्द में हम और तुम हो कर
मानूस फ़ज़ा में गुम हो कर
कुछ तुम ने कहा,कुछ हम ने सुना

इक शोरीदा ख़ामोशी में
साँसों में अटी सरगोशी में
कुछ तुम ने कहा,कुछ हम ने सुना

Recently Published:

ग़ज़ल

जो राह-ए-मुहब्बत न नज़र आई ज़रा और
छाई दिल-ए-माायूस पे तन्हाई ज़रा और

read more

Writer’s Block

Despite being a constant juggler of different roles that I play in my day-to-day life, the only thing I can really identify myself with is, being a writer.

read more

0 Comments

%d bloggers like this: