औरत

Published by Baraj

August 15, 2020

शर्म से निकले बगैर
औरत घर से नही निकल सकती
जरूरी नही चाँद को सभी अदब से देखें
कुछ आँखें घूरने के लिये होती है
नश्तर की चुभन से यूँ ही नही निकला जायेगा
बहुत जरूरी है अब
बख़्तरबंद के बिना
आग उगलती आँखों में
शालीन मौन के साथ
बेखौफ घर से निकलना
हर हाल में दो दो हाथ वास्ते

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नारी

मुझे मेरी उङान ढूँढने दो।
खोई हुई पहचान ढूँढने दो।

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