नारी

Published by Surinder Kaur

Ms. Surinder Kaur is a teacher by profession and multilingual writer by passion. Her work has been compiled in two books "विरह के रंग" and ਕਾਵਿ ਲਕੀਰਾਂ in Hindi and Punjabi respectively.

December 16, 2020

मुझे मेरी उङान ढूँढने दो।
खोई हुई पहचान ढूँढने दो।

आवाज़ दबाई गई मेरी,
कहा गया है ये मुझको,
सुनेगा न कोई तुझ को,
पहुँचे जो हर कान तक
मुझको वो अज़ान ढूँढने दो।
खोई हुई पहचान ढूँढने दो।

बता के मुझे फूल सी,
मसला,कुचला गया,
ठोकर दे जो सब को
मुझे वो पाषाण ढूँढने दो।
खोई हुई पहचान ढूँढने दो।

मर्दो को जन्मा मैने,
जग ये जानता है,
न कहे जो मुझको दासी
वो भगवान ढूँढने दो।
खोई हुई पहचान ढूँढने दो।

लाज क्यू मेरा गहना,
क्यू मुझको ही सहना,
पंख फैला कर उङ जाऊ
ऐसा खुला आसमान ढूँढने दो।
खोई हुई पहचान ढूँढने दो।

Recently Published:

ग़ज़ल

जो राह-ए-मुहब्बत न नज़र आई ज़रा और
छाई दिल-ए-माायूस पे तन्हाई ज़रा और

read more

0 Comments

%d bloggers like this: