…खेमेबाजियाँ साफ़ कहती है

Published by Baraj

August 15, 2020

खेमेबाजियाँ साफ़ कहती है
यहाँ कोई खुदा नही रहता

रूह की बात पे गर सब चलते
कोई मजहब जुदा नही रहता

किसी को छोटा करके ‘बराज’
दुनिया में कोई बड़ा नही रहता

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नारी

मुझे मेरी उङान ढूँढने दो।
खोई हुई पहचान ढूँढने दो।

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