अनन्त

जो परिभाषित नहीं हो सकता वही अनन्त है फ़िर प्रेम हो …………या ईश्वर

प्रेम

समर्पण, त्यागकरुणा, स्वतन्त्रताअनुराग……ह्र्दय की ये सभी भावनायेंजिस किसी भी व्यक्ति के प्रतिहम समर्पित कर दे,,,,,यही प्रेम है…… प्रेम करना कर्तव्य है,,,प्रेम पाना...

काल्पनिक प्रेम

मैं लिखता हूँ प्रेमकाल्पनिक प्रेम जिसे ना मैंने कभी पायाना कभी अनुभव कियाना कभी देखाना कभी जियासिर्फ़ लिखा औऱ लिखता गया सिर्फ़ एक कल्पना है, मेरा प्रेमकाल्पनिक...

निशानी

वो दोनों,जो एक दूसरे से अथाह प्रेम करते थे सहेज कर रखते थेएक-दूसरे के तोहफे,प्रेम की निशानियाँ समझकर वो दोनों , हाँ,वही दोनों समाज की बंदिशों से घबरा गएऔर उनके प्रेम की असली निशानीसुबह-सुबहकचरे के ढ़ेर में आवारा कुत्तेनोंच-नोंच कर खा...

..मेरे साँवरे…

प्रेम मुझसे नही,न सही ,न सही,इतना उपकार कर दो मेरे साँवरे।उम्र भर न मिलो तो शिकायत नहींइस पहर प्यार कर दो मेरे साँवरे।।प्रेम मुझसे नही,न सही, न सही…… बिंदियाँ,चूड़ियाँ मुझको भाती नहीपायलें अब किसी से लजाती नहीरूप ढकने से करती है घूँघट मनामुँह दिखाई की बेला भी आती नही...

सुकरात

सुकरात ने कहाप्रश्न करो,सत्ता से…धर्म से.. उसने किये भीकुछ चुभते प्रश्नसत्ता से..धर्म से.. उसके बादसुकरात,वो सुकरात नही रहा और फ़िरवो सुकरात ….नही...