वो तस्वीर देखी है?

वो तस्वीर देखी है?जिसमे किसी समंदर किनारेएक पुरानी सी बेंच परएक वृद्ध जोड़ा बैठा हुआउठती गिरती लहरों को देखतेहुएपंछियों के शोर को सुनतेहुएभीगी रेत पे पाँव गड़ोये हुएताज़ी हवा को कमजोर पड़तीसाँसों में भरते हुएएक दूसरे को देखकरमुस्कुराता हैउन आखों में अब शिकवेशिकायतें...

ग़ज़ल

जो राह-ए-मुहब्बत न नज़र आई ज़रा औरछाई दिल-ए-माायूस पे तन्हाई ज़रा और होता न ये ज़ुल्मत मेरी तक़दीर पे क़ाबिज़गर रौशनी तू होती शनासाई ज़रा और मुश्किल में था सूरज मेरा, बिन शाम ढला आजवर्ना अभी चलती मेरी परछाई ज़रा और बदनाम मेरी ज़ीस्त यहाँ कम थी ज़रा क्याजो मौत ने शोहरत...

किताब

क्यों नमैं और तुम, एक किताब लिखें! ज़िन्दगी के लेखों काथोड़ा हिसाब लिखें, जिसमें, भूतों से भयानक कर्ज़ों का ज़िक्र हो,बूढ़े बाप की पेशानियों परबच्चों की फ़िक्र हो, तपती सी ज़िन्दगी मेंदो शीतल पल प्यार के हों, कुछ एक पन्ने तोसहेलियोंऔर यार के हों, जो बिछड़ गए हैं,उनका...

तैराकी

बगैर तैराकी के जिनकी पीठ थपथपाई गयीवे उतरे जरूर दरिया में मगर लौटके नही आये

औरत

शर्म से निकले बगैरऔरत घर से नही निकल सकतीजरूरी नही चाँद को सभी अदब से देखेंकुछ आँखें घूरने के लिये होती हैनश्तर की चुभन से यूँ ही नही निकला जायेगाबहुत जरूरी है अबबख़्तरबंद के बिनाआग उगलती आँखों मेंशालीन मौन के साथबेखौफ घर से निकलनाहर हाल में दो दो हाथ...

शहर

इंसान की नहीं,यहाँ,हैसियत की क़दर है लौट चल गाँव ये तोमशीनों का शहर है